आज फिर से आपलोगो के लिए एक कहानी ले के आया हूं। और हमारी सारी कहानियां काल्पनिक होती हैं । लेकिन उनमें से सीखने को बहुत कुछ मिलता हैं । और आशा करता हूं आज की कहानी से भी आप लोग बहुत कुछ सीखा सकते हैं । ये कहानी तो जरूर हैं । लेकिन आज की सच्चाई को प्रदर्शित करती हैं। कही ना कहीं आप भी इसी गलतियां करते हैं । तो चलिए आज की सच्चाई को जानते हैं ।
एक दिन अचानक क्या हुआ कि क्राइस्ट फेसबुक पर आ गए। उन्होंने सोचा, सब कहते हैं कि दुनिया आपके चाहनेवालों से भरी पड़ी है तो क्यों न सबसे संपर्क स्थापित कर उनके हालचाल जान लिए जाएं। जब टेक्नोलॉजी ने इतना विकास कर ही लिया है कि यहीं बैठे-बैठे उनसे संपर्क स्थापित किया जा सकता है तो क्यों न इसका फायदा उठाया जाए? बस क्राइस्ट फेसबुक पर आ गए। अब यह कोई छोटी-मोटी बात तो थी नहीं, खबर आग की तरह चारों ओर फैल गई। रातोंरात 50 करोड़ के करीब फॉलोवर आ गए। और उधर क्राइस्ट ने अपने पहले संदेश में सबके हालचाल क्या पूछे कि करोड़ों मैसेजेज की भरमार भी हो गई। सबका एक ही सवाल था कि हम चर्च जाते हैं, बाइबल पढ़ते हैं, क्रिसमस से लेकर गुडफ्राइडे तक मनाते हैं, परंतु फिर भी ना तो हमारे जीवन से दुःख-दर्द कम हो रहे हैं, और ना ही हमें कोई अपेक्षित सफलता ही मिल रही है। ऊपर से उल्टा रोज-रोज क्रोध तथा फ्रस्ट्रेशन भी बढ़ता ही जा रहा है।
क्राइस्ट तो ये सब मैसेजेज पढ़ते ही चौक गए। उन्होंने तुरंत सबसे पूछा कि आपको यह सब करने को कह कौन रहा है! क्राइस्ट के इस सवाल पर फिर करोड़ों मैसेजेज आ टपके। सारे मैसेजों का सार एक ही था कि पादरी उन्हें यह सब करने को कह रहे हैं।
अब क्राइस्ट से ज्यादा समझदार कौन? वे पूरा खेल समझ गए। उन्होंने तुरंत तीसरा मैसेज पोस्ट करते हुए सबसे सीधा सवाल पूछा- भला मैंने अपने जीवन में कब किससे चर्च बनाने, चर्च जाने, मुझे पूजने, गुडफ्राइडे या क्रिसमस मनाने को कहा था? मेरा पूरा जीवन पढ़ लो, मैंने यह सब कहा ही नहीं था, क्योंकि मैं जानता हूँ कि यह सब करने से कुछ नहीं होनेवाला, इन्हीं सब प्रकार की बातों के खिलाफ तो मेरा संघर्ष था। लेकिन शायद तुमलोगों को फिर ट्रैप में ले लिया गया है। सीनागोग गए और चर्च आ गए, कोहेन गए और पादरी आ गए तथा जुइश गए और क्रिश्चियन आ गए। अब बाकी सब तो समझा परंतु यह क्रिश्चियन कहां से आ गए? जब मैंने सबको चाहा था, जब मैंने कहा भी था कि “जो चाहे-सो आवे" तो फिर तुमलोगों ने मेरे चाहनेवालों की अलग से पहचान कैसे बना ली? भला यह कैसे हो सकता है कि मेरे जैसा प्रेमी व्यक्ति सिर्फ क्रिश्चियनों को चाहे या उनका भला करे? मेरा इससे बड़ा अपमान ही नहीं हो सकता। यही तो पादरियों की चाल है कि तुम्हें विभाजित करें और अपनी दुकानें चलाते रहें।
बात तो सबकी समझ में आ गई, पर अब छुटकारा कैसे? सो सबने क्राइस्ट से ही निवेदन किया कि आप एकबार फिर धरती पर पधारें और जैसे पहले सबको जुड़श,
सीनागोग व कोहेन से छुड़वाया था, अबकी आकर हमको चर्च, पादरी व क्रिश्चियनिटी से छुड़वा दो, ताकि हम सब इन्सान बन सकें।
लोगों की ऐसी दरख्वास्त सुनते ही क्राइस्ट काफी दुखी हुए। उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि क्या मुझे यही एक काम रह गया है कि तुमलोग बार-बार ट्रैप में फंसते रहो और मैं तुम्हें छुड़वाने आता रहूं। मैंने सत्य फिर से समझा दिया है, तुमलोग वैज्ञानिक युग में जी ही रहे हो; बस खुद ही निकल जाओ इस 'ट्रैप' से।
इस पर सबने अंतिम निवेदन किया कि चलो इस ट्रैप से तो हम निकल ही जाएंगे परंतु आगे क्या? हमें सुख और सफलता कैसे मिलेगी? इसका कोई सीधा मार्ग बताएं।
इसके उत्तर में क्राइस्ट ने फिर एक लंबी-चौड़ी पोस्ट चढ़ा दी । उन्होंने उसमें खुलासा करते हुए कहा कि सुख और सफलता पाने का सूत्र मैं हजारों बार दोहरा चुका लेकिन लगता है कि चर्च और पादरियों के चक्कर में तुमलोगों ने मेरे उस सूत्र को नजरअंदाज कर दिया है। फिर याद करो, फिर मेरी कही बातें पढ़ो, आपको याद आ जाएगा। मैं हमेशा कहता था कि जो आप बांटेंगे वही हजार गुना होकर आपके पास फिर लौट आएगा मैंने कहा ही था कि जो बांटेगा वह भर दिया जाएगा और जो बचाने की कोशिश करेगा उससे छीन लिया जाएगा। बस यही सब तो सफलता के सार-सूत्र हैं। यह तुमलोगों के लिए या क्रिश्चियनों के लिए या फिर सिर्फ मेरे चाहने वालों के लिए सफलता के सूत्र हैं, ऐसा नहीं है, बल्कि जब तक धरती पर मनुष्य है तबतक यही सफलता के सूत्र रहनेवाले हैं। इसमें न मेरी जरूरत है न चर्च और पादरियों की, और ना ही क्रिश्चियनिटी की। लेकिन तुम थोड़ा अपने जीवन पे गौर कर लो। तुमलोग इससे उल्टा करते हो। पाना प्रेम चाहते हो, बांटते नफरत हो। अब नियम तो तुम्हारी चाह से बदलनेवाला नहीं। सो नफरत बांटते हो इसलिए हजार गुनी होकर दूसरों की नफरत तुम पर लौट आती है। चाहते सुख हो और बांटते दूसरों को दुःख हो। चाहते सफलता हो परंतु दूसरों की सफलता के मार्ग में रोड़ा अटकाते हो। चाहते हो सब तुम पर विश्वास करे, पर तुम किसी पर विश्वास नहीं करते।
और ऐसा एक-दो नहीं, तुम्हारे तमाम मामलों में ऐसा ही है। थोड़ा मनुष्यजाति का इतिहास उठाकर देख लो। बुद्ध ने ज्ञान बांटा उन्हें प्रकृति से कई गुना ज्ञान मिला। कृष्ण ने प्रेम बांटा- बदले में उन्हें हजारों गोपियों का प्रेम मिला। सो यह तय जानो कि जो बांटोगे वही पाओगे। सो पहले जीवन में यह तय कर लो कि तुम क्या-क्या पाना चाहते हो, बस वह सब बांटना शुरू कर दो।...और जो नहीं चाहते हो वह बिल्कुल मत बांटो। इतना सीधा तो गणित है. सो यदि आपका जीवन आपके हिसाब से नहीं चल रहा है, तो तय जान लो कि आप चाह कुछ और रहे हैं तथा बांट कुछ और रहे हैं।
और अब मैं अपना यह फेसबुक एकाउन्ट डिलीट कर रहा हूँ। मैंने तुमलोगों का हाल भी देख लिया और उस हाल का कारण भी जान लिया। और उसका उपाय भी बता दिया। आगे आप जानें व आपका निर्णय, क्योंकि मनुष्य अपने जीवन पुरता। समय स्वतंत्र था, है और रहेगा।
देखिए ये पोस्ट का मतलब किसी धर्म की आलोचना करना नहीं हैं । ना ही किसी धर्म को बढ़ावा देने क्योंकि यदि आप इसे अच्छे से पढ़े तो क्राइस्ट भी यही कहना चाहते हैं । मेरा उद्देश केवल सच को बताना हैं ।
पोस्ट में लास्ट तक बने रहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद । पोस्ट कैसा लगा ये कॉमेंट कर के जरूर बताएं । और यदि हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं ।तो नीचे दिए गए fb के बटन पे क्लिक कर के हमारे पेज को फॉलो कर सकते हैं ।

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