मनुष्य स्वतंत्र है या बंधा हुआ... ?



आज की पोस्ट एक सवाल के साथ शुरू होती हैं । जो हर व्यक्ति के मन में कभी ना कभी आती है । और आपके भी मन में जरुर आई होगी । तो उसी सवाल को मैं ने एक कहानी के रूप में समझने की कोशिश किया । आशा करता हूं की आपलोग को पसंद आए।


मनुष्य स्वतंत्र है या बंधा हुआ... ? 
पुरानेे जमाने की बात है जब भारत में गुरु-शिष्य परंपरा हुआ करती थी। प्रायः उन दिनों बच्चे गुरुकुल में रहकर ही शिक्षित हुआ करते थे। अक्सर इन गुरुकुलों में हफ्ते में एकाध बार प्रश्नोत्तर सेशन भी हुआ करता था। एक दिन ऐसे ही एक गुरुकुल में प्रश्नोत्तर सेशन के दरम्यान एक शिष्य ने गुरु से प्रश्न किया, क्या मनुष्य पूर्ण स्वतंत्र है? गुरु ने कहा- हां। यह सुन दूसरे शिष्य ने सवाल किया क्या मनुष्य बिल्कुल बंधा हुआ नहीं है? गुरु ने कहा है । अब करीब बारह शिष्य उस समय गुरुकुल में पढ़ रहे थे। सब-के-सब बुरी तरह चौंक गए। गुरु “मनुष्य स्वतंत्र है" में भी हां कह रहे हैं व “बंधन है” उसमें भी हां कह रहे हैं। सो, एक तीसरे शिष्य ने इस बात का रहस्य जानना चाहा। गुरु ने तुरंत हँसते हुए उसी शिष्य को ऊपर बुलवाया, और फिर उसको सब शिष्यों के सामने मुंह करके खड़ा होने को कहा। जैसे ही वह खड़ा हो गया, गुरु ने अगली आज्ञा दी; एक पांव ऊपर कर दो। .... शिष्य ने दायां पांव ऊपर कर दिया। गुरु ने चन्द सेकन्ड बाद दूसरी आज्ञा दी- अब दूसरा पांव ऊपर करो प्रश्न ही नहीं उठता था। सबकी हँसी के बीच गुरु ने कहा- यही मनुष्यजीवन है। पहला स्टेप भरने हेतु वह पूर्ण स्वतंत्र है । यह शिष्य भी जब मैंने कहा कि एक पांव ऊपर करो तब दाएं की जगह बायां भी ऊपर कर सकता था, या पांव ऊपर उठाने से इन्कार भी कर सकता था, परंतु जैसे ही उसने दायां पांव ऊपर किया कि वह बंध गया। बस यही जीवन का खेल है, मनुष्य कर्म करने हेतु स्वतंत्र है, परंतु कर्म करते ही वह उसके फल से बंध जाता है।

तो देखा आपने की इंसान बस कर्म करने के लिए आजाद हैं । कर्म करने के बाद वो ना चाहते हुऐ भी फल रूपी जाल में फंस जाता हैं । ""वैसे तो गीता में  भगवान कृष्ण ने खुद कहा हैं । की तुम  कर्म करो फल की चिंता मत करो। ""
 इसलिए आपने कर्म पे ध्यान दे । और कर्म वही करें। जिसके फल पा कर आप मजबूर नहीं बल्कि मजबूत बन सकें।
 आशा करता हूं कि मेरी कहानी आपको पसंद आई होगी । पोस्ट को लास्ट तक पढ़ने के लिए धन्यवाद् । आप लोगो के support और प्यार के लिए दिल से शुक्रिया ।


Motivation

Hey, i am Ankit Kumar from Jamshedpur but my native place is Bihar and i am a student in Bca (l) ,i am also a web developers, ethical hacker, blogger, affiliate marketer, and digital marketer.

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