क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आप किसी भी बात में believe करते हो तो क्यों करते हो और believe नहीं करते हो तो क्यों नहीं करते हो?
How do you develop critical thinking skills?
कभी कभी ऐसा क्यों होता है ? की हम किसी ऐसे person या उसकी बातों पे belive कर लेते जो belive के लायक नहीं और धोखा खा जाते है । और कई बार correct person या correct point को केवल इसलिए reject कर देते हैं । क्युंकी वो बस आपको अच्छा नहीं लग रहा होता है । फिर आपको lifetime तक regerat रहता हैं की मैंने ऐसा क्यों किया ? Actually ये सब एक चीज की कमी के कारण या यूं कहिए एक skill की कमी के कारण होता हैं। और उस skill को critical thinking कहते हैं। किसी भी information या बात को accept करने से पहले उस information की evaluation करना, उसमें logics ढूंढ़ना, reasoning करना, सवाल करना और उसको different angles से देखना या किसी भी information को as it is accept नहीं करना, इसे ही critical thinking कहा जाता हैं। जिस person में critical thinking होती हैं उसको manipulate करना बहुत मुश्किल होता हैं क्योंकि वो अपनी reasoning और logical ability से find out कर लेता हैं कि कौनसी बात fact है और कौनसी fake हैं। मेरे साथ भी एक बार एक ऐसा ही छोटा सा incident हुआ था । की मैंने भी एक बार बिना logic के किसी के emotional बातों में आ गया । हलाकि बहुत जल्द उन्होंने आपना रूप दिखा दिया । मैंने उसे logical decision लिया और उस situation से निकल पाया ।
Act Like a Judge of a Courtroom
Critical thinking को better तरीक़े से समझाने के लिए में आपके साथ एक example share कर रहा हूं। क्या आप जानते हैं जब court में कोई case आता है तो judge उसका (verdict) फैसला सुना से पहले क्या करता है? क्या judge साहब बिना किसी evidence और logics के ही अपना फ़ैसला
सुना देते हैं? क्या judge साहब वकील और गवाह की बात को as it is accept कर लेते हैं? बिना सबूत के? क्या एक ही party की बात को सुनकर judge अपना फ़ैसला सुना देता हैं? नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं होता हैं। judge अपना फैसला सुना से पहले सारे सबूत देखता है. दोनों पार्टी के lawyers को सुनता हैं और गवाहों को भी सुनता हैं। Then जिसके logics और evidence strong होते हैं उसके हक़ में फ़ैसला सुनाया जाता हैं। Judge के लिए दोनों parties equal है। Judge कभी भी partially और एक तरफ़ा नहीं सोच सकता, उसको neutral रहना पड़ता हैं। In same way आपको भी information या opinion accept करने से पहले उसमें कितनी सच्चाई है उसका पता लगाना चाहिए। जिसके लिए Critical thinking की आवश्यकता होती है। Critical thinking का simple सा अर्थ है किसी भी बात को न तो as it is accept करो और नाही उसके सारे aspects
(पहलू) देखे बिना उसे reject करो। क्योंकि Correct decision लेने के लिए आपको interrogative approach apply करनी पड़ेगी। interrogative का अर्थ होता है probing करना ( सवाल करना) जैसे police सच का पता लगाने के लिए interrogation करती हैं। क्योंकि police investigation, probing से ही शुरू होती हैं। अगर police probing नहीं करेंगी या interrogate नहीं करेंगी तो कैसे पता चलेगा कि सच क्या है और झूठ क्या है? क्योंकि हम जो देखते हैं, सुनते हैं और सोचते हैं वो हमेशा सही नहीं होता और गलत भी नहीं होता।
इसलिए आप भी logically सोचिये , और खुश रहे क्युकि उदाश होने का 70% कारण यही था ।
पोस्ट में last तक बने रहने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद । आश करता हूँ की इस पोस्ट से आपको कुछ नया सिखने का मौका मिला मिला होगा । आपको पोस्ट कैसा लगा comment कर के जरुर बताये ।
Thanks!

Superb
जवाब देंहटाएंVery knowledgeable information
जवाब देंहटाएं🙏🙏🙏